नवीनतम प्रविष्टियां

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धर्मिक बनें

सार्वभौमिक व वैज्ञानिक सत्य ही सार्वभौमिक धर्म है। श्रेष्ठ आचरण का नाम ही धर्म है। धर्म मात्रा प्रतीकात्मक नहीं आचरणात्मक है। आचारहीन प्रतीकात्मक धर्म से भ्रम या धर्मन्धता पैदा होती है। अतः हम धर्मिक बनें, धर्मान्ध नहीं।

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स्वाभिमान की प्रतिष्ठा

जिस देश के लोगों में स्वाभिमान नहीं होता, जिस देश के लोगों में पराक्रम और शौर्य नहीं होते, उस देश की आजादी कभी लम्बे समय तक जीवित नहीं रह सकती |

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जीवन के आदर्श

बच्चों जैसी निर्मलता व निर्भयता, जवानों जैसा जोश, प्रौढ़ जैसा होश व संन्यासी जैसा समर्पण-ये मेरे जीवन के आदर्श हैं।

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ज्ञान का अर्थ

ज्ञान का अर्थ मात्रा जानना नहीं, वैसा हो जाना है। ‘‘स एवं भवति य एवं वेद’’।

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पवित्रा विचार-प्रवाह

विचारशीलता ही मनुष्यता और विचारहीनता ही पशुता है। पवित्रा विचार-प्रवाह ही मधुर वाणी व प्रभावशाली जीवन का मूल स्रोत है।

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अतीत का बोध्

अतीत को कभी विस्मृत नहीं करना चाहिए। अतीत का बोध् हमें गलतियों से बचाता है तथा शीर्ष पर पहुँचे हुए व्यक्ति को अतीत की स्मृति अहंकार नहीं आने देती।

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