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योग एवं यज्ञ:

ये दो जीवन रूपी नदी के दो तीर हैं| योग केन्द्र है, यज्ञ परिधि है, हमारे जीवन की| योग का अर्थ है शारीरिक, मानसिक, आर्थिक, सामाजिक…सभी प्रकार की शक्तियों का अर्जन तथा यज्ञ से तात्पर्य है, सर्वहित में, सबसे सुख व प्रशन्नता के लिए उन शक्तियों को सेवा में लगाना|

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मैं भारत से हूँ

मेरा सिर हिमालय, मेरी बाईं भुजा पूर्वांचल व चरणों की ओर हिन्द महासागर है। मुझमें भारत है। मैं भारत से हूँ। मैं भारत हूँ।

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श्रद्धा

श्रद्धा माँ, और विश्वास पिता है। श्रद्धा सत्य ज्ञान की उपलब्धि एवं परमशक्ति का सोपान है। श्रद्धा आध्यात्मिक जीवन का अभिषेक तत्व है।

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कठोर अनुशासन व दृढ़ता

फूल से अधिक कोमल स्वभाव एवं वज्र से अधिक कठोर अनुशासन व दृढ़ता वाली प्रकृति के लोग ही सच्चे अनुशास्ता, प्रशासक या नेता हो सकते हैं।

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संशय नहीं करना चाहिए

बल का दुरुपयोग, ज्ञान का अनादर तथा विश्वास में संशय नहीं करना चाहिए। जीवन में संशय कम्प्यूटर के वायरस की तरह होता है।

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योग की सर्वोच्च उपलब्धि

योग की सबसे बड़ी उपलब्धि है अज्ञान व अज्ञानजनित दोषों, अहंकार, अभाव, क्लेशों, विकारों व समस्त अशुभ से मुक्त होकर अपनी निजता, अपने मूल स्वरूप या मूल स्वभाव में जीना, यही योग है|

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