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भारत देश हमारा है

हम देश को न लूटेंगे, न कमजोर बनायेंगे, न तोड़ेंग लेकिन साथ ही देश को न लूटने देंगे न कमजोर बनाने देंगे और ना ही देश को तोड़ने देंगे।

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जीवन का शाश्वत सिद्धांत

संतुलन ही जगत व जीवन का शाश्वत सिद्धांत है, संतुलन ही स्वास्थ्य है, भौतिक एवं भावनात्मक असंतुलन, अनियन्त्राण, अनियमितता व विषमता से ही सब रोगों का जन्म होता है।

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पवित्र विचार-प्रवाह

पवित्र विचार-प्रवाह ही व्यक्ति के पवित्र आहार, पवित्र व्यवहार, पवित्र आचरण व पवित्र जीवन का आधर है।

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भगवान् दयालु पिता है

भगवान् से पद, सत्ता, सम्पत्ति या दुनियाँ के वैभव की याचना नहीं करना क्योंकि वह दयालु पिता बिना मांगे हमारी क्षमता, योग्यता अथवा पात्राता से सदा ही अधिक देता है।

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विकास का अर्थ

विकास का अर्थ यह नहीं कि एक समर्द्ध समृद्ध व्यक्ति और अधिक सम्पत्ति अर्जित कर ली है अपितु देश व दुनियाँ के अंतिम आम आदमी को शिक्षा, चिकित्सा, सामाजिक न्याय व सम्मान हम कितना दे पा रहे हैं।

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क्या है बुद्धि के तीन भाग

धृति, कृति, स्मृति, धृति-मतलब अच्छा-बुरा विचार करने वाली बुद्धि, कृति-जो धृति में अच्छा है वो आप के मन में ऐसा बैठ जाये कि ये आप का संस्कार बन जाये, आप का अभ्यास बन जाये, स्मृति-एक क्षण भी अपने लक्ष्य की विस्मृति नहीं होनी चाहिये

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