संतुलन ही जगत व जीवन का शाश्वत सिद्धान्त है, संतुलन ही स्वास्थ्य है, भौतिक एवं भावनात्मक असंतुलन, अनियन्त्राण, अनियमितता व विषमता से ही सब रोगों का जन्म होता है।