मृत्यु समाधन नहीं, क्योंकि मरकर पुनः जन्म लेना सुनिश्चित है, अतः दुनियाँ से भयभीत होकर, अपनों की पीड़ा एवं विश्वासघात से आहत होकर अवसाद में मृत्यु को स्वीकारना मूर्खतापूर्ण होगा।