हम राष्ट्रधर्म के प्रतिनिधित्व व प्रचारक है। यह हमें सदा स्मरण रखना चाहिए कि हमारा सम्पूर्ण व्यक्तित्व, हमारी वाणी, व्यवहार, खान-पान व आचरण ऋषि संस्कृति की गरिमा के पूर्ण रूप से अनुकूल रहना चाहिए।