कर्म ही मेरा धर्म है। कर्म ही पूजा है। कर्म ही जीवन व जगत का सत्य है। निष्काम कर्म, कर्म का अभाव नहीं, अपितु कर्त्तव्य के अहंकार का अभाव होता है।