भक्तियोग ज्ञानपूर्वक अकर्त्ता होकर जो दिव्य कर्म किया जाता है वही भक्तियोग है | अकाम, अचाह या निष्काम होकर अनासक्त भाव से हम जो भी सेवा, कर्म, तप, पुरुषार्थ या दिव्य प्रवृत्ति करते हैं वह सब भक्तियोग ही है |