यदि पूरे जीवन को एक शब्द में कहा जाये तो वह है अभ्यासों की सात्विकता, प्रातः उठने से लेकर रात को सोने तक शरीर, इन्द्रियों, मन, बुद्धि, चित्त व संस्कारों से लेकर सोच, विचार, वाणी, व्यवहार, आहार, स्वभाव व सम्बन्धों में पूर्ण सात्विकता के साथ हमें जीने का अभ्यास करना चाहिए |