योग की सबसे बड़ी उपलब्धि है अज्ञान व अज्ञानजनित दोषों, अहंकार, अभाव, क्लेशों, विकारों व समस्त अशुभ से मुक्त होकर अपनी निजता, अपने मूल स्वरूप या मूल स्वभाव में जीना, यही योग है|