जीने के लिए दो गज जमीन, तन ढ़कने के के लिए दो वस्त्र एवं भूख मिटाने के लिए दो रोटी तो सबको मिल ही जाती है। तृष्णा किसी भी व्यक्ति की कभी तृप्त नहीं होती।