अपने बच्चों को कितनी सम्पत्ति दी, यह महत्वपूर्ण नहीं अपितु संस्कारों की विरासत कितनी दी, यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि संस्कारों की नींव पर ही जीवन की इमारत व संसार का साम्राज्य खड़ा होता है।