भगवान् से पद, सत्ता, सम्पत्ति या दुनियाँ के वैभव की याचना नहीं करना क्योंकि वह दयालु पिता बिना मांगे हमारी क्षमता, योग्यता अथवा पात्राता से सदा ही अधिक देता है।