भगवन हम सबको साधना काल में समाधि लगाने व व्यवहार काल में निष्काम सेवा करने का सामर्थ्य प्रदान करे|हम सत्ता, सम्पत्ति, सम्मान व भौतिक सुखों के लिए काम नहीं करें, अपितु आत्मा में उठने वाली प्रेरणा रूपी परमात्मा की आज्ञा, वेद आज्ञा, शास्त्र आज्ञा व गुरु आज्ञा में ही रहकर, निमित्तमात्र होकर अनास्क्त्त अनास्त्त्व भाव से ब्रह्मभाव में अवस्थित रहकर केवल भगवन के लिए ही कर्म, प्रवृत्ति, पुरुषार्थ, तप या सेवा करें|