पूर्ण सुखी जीवन जीने के दो अत्यन्त महत्त्वपूर्ण उपाय है| एक हम बाह्मरूप से आर्थिक दरिद्रता से मुक्त रहें तथा दूसरा उपाय है हम ईश्वर प्रदत्त पूर्णता से युक्त रहें| बाह्म समृद्धि से हम बाहर से सुखी, स्वस्थ, सुरक्षित, सम्मानित व शान्तिपूर्ण जीवन जी सकें तथा अपने भीतर की निजता, दिव्यता व समस्त प्रकार की पूर्णता से मुक्त होकर हम समान अभावों से मुक्त हो जाये|