मैनें बचपन से एक आध्यात्मिक योगी जीवन जीया है| आध्यात्मिक जीवन जीने वाले अधिकांश लोगो में मैंने मुक्ति के सन्दर्भ में एक बहुत बड़ी भ्रान्ति अनुभव की है और वह यह कि जिसे देखो वही मुक्ति पाना चाहता है परन्तु मुक्ति के साधनों की तरफ जितना ध्यान होना चाहिए उतना अधिक ध्यान नहीं होता| मुक्ति के साधन है शुद्ध  ज्ञान, शुद्ध कर्म, शुद्ध भक्ति श्रद्धा उपासना, दो शब्दों में कहें तो निष्काम नि:स्वार्थ सेवा तथा भगवान में अनन्य प्रीति| पवित्र आचरण करते हुए जब जीवन में निरन्तर अखण्ड प्रचण्ड पुरुषार्थ व परमार्थ करते रहते हैं तो मुक्ति तो एक सहज परिणाम है पवित्रता का, शुभ आचरण का वह पाई नहीं जाती सहज मिल जाती है| जैसे बीज बोओं फसल अपने आप मिलेगी|साधन बीज रूप है मुक्ति फसल की तरह है|