ईश्वर प्रदत्त ज्ञान, सवंदेना एवं सामर्थ्य को जो कि प्रत्येक मनुष्य के भीतर बीज रूप में होता है उसे अत्यन्त पुरुषार्थ करके विकास करना और इन ऐश्वर्यों को बढाकर इन्हें समृद्धि का स्वरूप देना को जानता है वह संसार में सफल व्यक्ति बन जाता है|