पूजा-भक्ति में प्रथम पूजा-भक्ति राष्ट्र की, उसके बाद ईश-भक्ति, मातृ-पितृ भक्ति व गुरुभक्ति आदि को मानना। वन्दना में प्रथम राष्ट्रवन्दना, धयान में प्रथम देश का धयान, चिन्तन व चिन्ता में भी प्रथम राष्ट्र का चिन्तन व राष्ट्र की चिन्ता, काम में प्रथम देश का काम, अभिमान में जो प्रथम स्वदेश का स्वाभिमान करे, वह राष्ट्रवादी है।