मेरे मस्तिष्क में ब्राह्मण जैसा विवेक, मेरी भुजाओं में क्षत्रियों जैसा शौर्य, बल पराक्रम ऊर्जा व स्वाभिमान, उदर में वैश्य जैसा व्यापार व प्रबन्धन कौशल व चरणों में शूद्रवत् सेवा करने का सामर्थ्य है। यही मेरा वर्णाश्रम धर्म है।