जब अपवित्र विचारों से एक व्यक्ति के भीतर घृणा व नफरत के बीज बोये जा सकते हैं तो पवित्र विचारों से एक व्यक्ति के जीवन में प्रेम, करुणा व वात्सल्य के पुष्प क्यों नहीं खिलाए जा सकते?