हजारों शब्दों से एक कर्म की ध्वनि अधिक सबल होती है व तीव्र गुंजायमान होती है। अतः हम मात्र प्रवचन से नहीं अपितु आचरण से परिवर्तन करने की संस्कृति में विश्वास रखें।