भगवान् ही माता-पिता बनकर हमें जन्म देते हैं तथा गुरु बनकर हमें ज्ञान देते हैं। इस प्रकार सब सम्बन्धों में ब्रह्म-सम्बन्ध की अनुभूति करना ही योग है।