बार-बार सद्गुरुओं का सान्निध्य एवं उनके जीवन, शिक्षाओं एवं आचरण का ध्यान हमें भीतर से बल प्रदान कराता है और हमारे जीवन के पुण्य को अखंड बनाये रखता है।