दिव्य ज्ञान, दिव्य प्रेम, दिव्य कर्म, दिव्य वाणी, दिव्य व्यवहार, दिव्य स्वभाव, दिव्य आचरण, दो शब्दों में कहे तो दिव्य दृष्टि, दिव्य कृति, सम्पूर्ण जीवन में दिव्यता और इस का आधार है योग-आसन,प्राणायाम, ध्यान, समाधि | भोर में जो उठ कर योग करेंगे और दिन में कर्म योग करेंगे तो उनका पूरा जीवन ही दिव्य हो जायेगा|