पूरे जीवन को एक शब्द में कहें या परिभाषित करें तो वह है- अभ्यास। जैसे हमारे सोचने, विचारने, खाने-पीने, कमाने, बोलने व जीने के अभ्यास होते हैं, वैसा ही हमारा जीवन हो जाता है।