हर दिन प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में उठते ही ये विचार व चिंतन करें कि मैं मूलतः ईश्वर की संतान, ऋषि-ऋषिकाओं, वीर-वीरांगनाओंकी संतान या भारत माता की संतान हूँ।