हमारे बाहर व भीतर निरन्तर एक देवासुर संग्राम चल रहा है। इस संघर्ष में आसुरी-शक्तियाँ चाहें कितनी ही प्रबल क्यों न हो, परन्तु अन्ततः विजय दैवी-शक्तियों की ही होती है।