श्रेणी पुरालेख | दैनिक विचार

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अपनी शक्तियों को पहचानों

बिना संघर्ष किए कभी भी विजय नहीं मिलती, अतः अपनी शक्तियों को पहचानों एवं संगठित होकर इन आसुरी शक्तियों को परास्त कर दो।

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वर्तमान में जीना

अतीत व्यतीत हो चुका है, भविष्यत अनागत है अतः जहाँ हो वहीं समग्रता से वर्तमान में जीना, ही योग है।

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शाश्वत सिद्धान्त

संतुलन ही जगत व जीवन का शाश्वत सिद्धान्त है, संतुलन ही स्वास्थ्य है, भौतिक एवं भावनात्मक असंतुलन, अनियन्त्राण, अनियमितता व विषमता से ही सब रोगों का जन्म होता है।

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अपना समय निन्दा में व्यर्थ ना करे

जो किसी की निन्दा स्तुति में ही अपने समय को बर्बाद करता है वह बेचारा दया का पात्रा है, अबोध् है।

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मानव जीवन की आधरशिला

गर्भाधान, पुंसवन, सीमन्तोन्नयन, जातकर्म, नामकरण, यज्ञोपवीत व वेदारम्भादि सोलह संस्कार मानव जीवन की आधारशिला है।

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सेवा से शक्ति

योग से शक्ति, ज्ञान से मुक्ति, प्रेम से भक्ति व सेवा से शक्ति मिलती है। सेवा से शक्ति मिलने का अर्थ है कि जब हम सेवा करते हैं तो हमारे पवित्रा संकल्प को पूर्ण करने को पूर्ण करने के लिए समाज व राष्ट्र हमारे साथ खड़ा हो जाता है।

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