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श्रद्धा माँ-विश्वास पिता

श्रद्धा माँ, और विश्वास पिता है। श्रद्धा सत्य ज्ञान की उपलब्धि एवं परमशक्ति का सोपान है। श्रद्धा आध्यात्मिक जीवन का अभिषेक तत्व है।

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मोह-माया के बन्धन

सत्संग, स्वाध्याय, श्मशान एवं संकट के समय जैसी व्यक्ति की मति होती है वैसी ही बुद्धि यदि सदा स्थिर हो जाए तो जीव मोह-माया के बन्धन से मुक्त हो जाता है।

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जीवन में क्षितिज

जीवन के क्षेत्र में क्षितिज तक वे ही पहुँचते हैं जो आग्रह नहीं रखते। आग्रह हमें कुण्ठित एवं संकीर्ण बना देते हैं। आग्रह के टूटने पर सत्य का द्वार अनावृत होता है।

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मोह-माया के बन्धन

सत्संग, स्वाध्याय, श्मशान एवं संकट के समय जैसी व्यक्ति की मति होती है वैसी ही बुद्धि यदि सदा स्थिर हो जाए तो जीव मोह-माया के बन्धन से मुक्त हो जाता है।

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संस्कारों की नींव

अपने बच्चों को कितनी सम्पत्ति दी, यह महत्वपूर्ण नहीं अपितु संस्कारों की विरासत कितनी दी, यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि संस्कारों की नींव पर ही जीवन की इमारत व संसार का साम्राज्य खड़ा होता है।

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कर्म की ध्वनि

हजारों शब्दों से एक कर्म की ध्वनि अधिक सबल होती है व तीव्र गुंजायमान होती है। अतः हम मात्रा प्रवचन से नहीं अपितु आचरण से परिवर्तन करने की संस्कृति में विश्वास रखें।

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