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दिव्य जीवन

दिव्य ज्ञान, दिव्य प्रेम, दिव्य कर्म, दिव्य वाणी, दिव्य व्यवहार, दिव्य स्वभाव, दिव्य आचरण, दो शब्दों में कहे तो दिव्य दृष्टि, दिव्य कृति, सम्पूर्ण जीवन में दिव्यता और इस का आधार है योग-आसन,प्राणायाम, ध्यान, समाधि | भोर में जो उठ कर योग करेंगे और दिन में कर्म योग करेंगे तो उनका पूरा जीवन ही दिव्य हो जायेगा|

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योग का अनुष्ठान

“योग” का अनुष्ठान समस्त उद्वेगों को निरस्त कर मन को सम्बल प्रदान करता है, योगाभ्यास संकल्पशक्ति में आश्चर्यजनक अभिवृद्धि कर देता है, जिसके फलःस्वरूप जीवन में संतुलन और आनंद का स्वाभाविक संचार होने लगता है |

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मन को केन्द्रित करने का उपाय

मन को केन्द्रित करने का उपाय है प्राणायाम, दूसरा उपाय है धारण, संकल्प, विचार| विचार पूर्वक मन को केन्द्रित कर सकते है, प्राणायाम पूर्वक मन को केन्द्रित कर सकते है, ज्ञान पूर्वक मन को केन्द्रित कर सकते है, धारण-ध्यान पूर्वक मन को केन्द्रित करना | भगवान के अनन्त गुण, कर्म, स्वभाव का ध्यान करते हुए […]

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यम-नियमों के पालन के बिना योग अधूरा है

सुबह के योग अभ्यास के साथ-साथ जीवन में आचरण में, व्यवहार काल में भी हमें यम-नियमों का पालन करना चाहिए | पांच यम – अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह और पांच नियम – शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय, ईश्वर | जब हम यम – नियमों का पालन करेंगे और समाज के लोग भी जीवन में सार्वजनिक […]

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योग का आधार

जिसका अष्टांग योग सिद्ध हो जाता है उसके हट योग, ज्ञान योग, कर्म योग, भक्ति योग, समाधि योग, सारे योग सिद्ध हो जाते है | जीवन में सारी सिद्धिया, सारी सभ्यता, सारे सुख, शांति, आनंद पाता है और पूर्णता पाता है | इसलिए योग का आधार है अष्टांग योग है |

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धर्म क्या है ?

विद्यार्थी काल में सबसे बड़ा धर्म है विद्या धर्म, राष्ट्र के प्रति अपना कर्त्तव्य – राष्ट्र धर्म है| परिवार के प्रति उत्तरदायित्व उस को कहा जाता है – परिवार धर्म | विश्व के प्रति अपना कर्त्तव्य – विश्व धर्म | धर्म का शब्द कोई रीलिजन नहीं है – धर्म तो सत्य है, शाश्वत नित्य सत्य […]

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