श्रेणी पुरालेख | दैनिक विचार | पृष्ठ 2

Archive

प्राण

प्राण रोग, विकार एवं चित्त के अंध्कार को दूर करने वाला अग्नि, अश्विनी, कुमार एवं हरि है।

० टिप्पणी
आगे पढ़ें
divider

समर्थ गुरु का महत्त्व

जब तक जीवन में समर्थ गुरु नहीं मिलता तब तक सही समझ नहीं होती, और सही समझ नहीं होने पर व्यक्ति कभी सुखी नहीं हो सकता|

० टिप्पणी
आगे पढ़ें
divider

गुरु का सच्चा दर्शन

गुरु या साधु-संत के साथ मन, बुद्धि,  वाणी, व्यवहार एवं संकल्प से एकाकार हो जाना तथा उन जैसी दिव्य चेतना के साथ जीवन को जीना ही उनका सच्चा दर्शन है।

० टिप्पणी
आगे पढ़ें
divider

विजय दैवी-शक्तियों की ही होती है

हमारे बाहर व भीतर निरन्तर एक देवासुर संग्राम चल रहा है। इस संघर्ष में आसुरी-शक्तियाँ चाहें कितनी ही प्रबल क्यों न हो, परन्तु अन्ततः विजय दैवी-शक्तियों की ही होती है।

० टिप्पणी
आगे पढ़ें
divider

प्रार्थना या प्रायश्चित्

प्रार्थना या प्रायश्चित् (तौबा) उसको कहते हैं जो एक बार करके, दुबारा न करनी पड़े।

० टिप्पणी
आगे पढ़ें
divider

विचार

विचार सबसे बड़ी शक्ति व सम्पत्ति है। विचार विश्व की सबसे बड़ी ताकत है। विचार में अपरिमित बल व ऊर्जा है।

० टिप्पणी
आगे पढ़ें
divider
पिछला पृष्ठ | अगला पृष्ठ