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राष्ट्रवादी

पूजा-भक्ति में प्रथम पूजा-भक्ति राष्ट्र की, उसके बाद ईश-भक्ति, मातृ-पितृ भक्ति व गुरुभक्ति आदि को मानना। वन्दना में प्रथम राष्ट्रवन्दना, धयान में प्रथम देश का धयान, चिन्तन व चिन्ता में भी प्रथम राष्ट्र का चिन्तन व राष्ट्र की चिन्ता, काम में प्रथम देश का काम, अभिमान में जो प्रथम स्वदेश का स्वाभिमान करे, वह राष्ट्रवादी […]

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संन्यास

न जीवन से पलायन, न मौत का गम, हमें रहना है सदा सम, यही योग है। अनासक्त होकर कर्मफल की इच्छा से रहित होकर जी संन्यास है।

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संघर्ष से सफलता – प्रमाद से पतन

जीवन में सफलता या कामयाबी सबका सपना होता है|समाजिक, राजनैतिक, आर्थिक या आध्यात्मिक जीवन में सफलता पाने के लिए एक बहुत बड़ा संघर्ष करना पड़ता है| अधिकांश लोग थोडासा संघर्ष करने पर ही विचलित हो जाते है और अपने गन्तव्य तक नहीं पहुँच पाते| मैं चाहता हूँ कि माता पिता गुरु जन व समाज के […]

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हमारा कर्त्तव्य

अपने ऋषियों के संकल्पों को पूर्ण करना ही हमारा कर्त्तव्य है। हम प्रत्येक व्यक्ति के जीवन और व्यवस्था में वैदिक शिक्षा और संस्कारों का पूर्ण समावेश चाहते हैं।

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अन्याय व अपराध का विरोध

यदि तुम अन्याय व अपराध का विरोध नहीं करते हो तो समझ लो कि तुम स्वयं भी अन्याय, अधर्म व शोषण के समर्थक हो।

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विकास का अर्थ

विकास का अर्थ यह नहीं कि एक समृद्ध  व्यक्ति और अधिक  सम्पत्ति अर्जित कर ली है अपितु देश व दुनियाँ के अंतिम आम आदमी को शिक्षा, चिकित्सा, सामाजिक न्याय व सम्मान हम कितना दे पा रहे हैं।

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