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उद्योग माँ भारती के मन्दिर

उद्योग माँ भारती के विकास के ऐसे मन्दिर हैं जहाँ कर्मचारी रूपी पुजारी अपने कर्म (काम) पुरुषार्थ रूपी पूजा से माँ भारती की वन्दना करते हैं और देश को समृद्ध व शक्तिशाली बनाते हैं।

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व्यक्तित्व की पूजा

एक अच्छे साधक

जगत् कल्याण के लिए सुधारक बनने से पहले एक अच्छे साधक बनना। साधक बन जाओगे तो सुधार तो स्वतः ही घटित होगा।

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चितशुद्धि

बिना सेवा के चित्त शुद्धि  नहीं होती है और चितशुद्धि के बिना परमात्मतत्त्व की अनुभूति नहीं होती। अतः सेवा के अवसर ढू़ंढ़ते रहना चाहिए।

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संवेदनशील बनों

भावुकता व्यक्ति को विवेकशून्य बना देती और संवेदनहीनता इन्सानियत को मिटा देती है। अतः भावुक नहीं संवेदनशील बनों।

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सच्चा दर्शन

गुरु या साधु-संत के साथ मन, बुद्धि, वाणी, व्यवहार एवं संकल्प से एकाकार हो जाना तथा उन जैसी दिव्य चेतना के साथ जीवन को जीना ही उनका सच्चा दर्शन है।

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