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योग की सर्वोच्च उपलब्धि

योग की सबसे बड़ी उपलब्धि है अज्ञान व अज्ञानजनित दोषों, अहंकार, अभाव, क्लेशों, विकारों व समस्त अशुभ से मुक्त होकर अपनी निजता, अपने मूल स्वरूप या मूल स्वभाव में जीना, यही योग है|

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ज्ञान

ज्ञान एक बहुत ही व्यापक विषय है इसमें ज्ञान, विज्ञान, अनुसंधान, तत्वज्ञान एवं विविध कौशल समाहित होते हैं | ज्ञान का अन्तिम परिणाम, लक्ष्य या गन्तव्य है कि हमें यह समझ में आ जाय कि सब कुछ का मूल आधार भगवान् है|

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अभ्यास की सात्विकता

यदि पूरे जीवन को एक शब्द में कहा जाये तो वह है अभ्यासों की सात्विकता, प्रातः उठने से लेकर रात को सोने तक शरीर, इन्द्रियों, मन, बुद्धि, चित्त व संस्कारों से लेकर सोच, विचार, वाणी, व्यवहार, आहार, स्वभाव व सम्बन्धों में पूर्ण सात्विकता के साथ हमें जीने का अभ्यास करना चाहिए |

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प्रकृति हमारी माँ

प्रकृति हमारी माँ है। इसकी रक्षा करो तथा वृक्ष हमारी रक्षा करने वाले पिता रूप हैं। इस जन्म में तुमने जितनी ऑक्सीजन ली है, उतनी ऑक्सीजन वृक्षारोपण करके प्रकृति को वापस लौटाओ।

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कर्मयोग या दिव्यकर्म

जब हमें यह बोध हो गया कि समस्त ज्ञान, शक्ति एवं ऐश्वर्य का मूल आधार भगवान है तो हम निमित्त मात्र होकर, भगवान् के यंत्र बनकर वेदानुकूल, शास्त्रानुकूल, ऋषियों या मुद्दे के अनुकूल व आत्मनुकुल आचरण करने लगते हैं |इसी को प्रीति पूर्वक, धर्मानुसार यथायोग्य न्यायपूर्ण व विवेकपूर्ण व्यवहार भी करते हैं| हम अकर्त्ता होकर […]

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श्रद्धा

श्रद्धा माँ, और विश्वास पिता है। श्रद्धा सत्य ज्ञान की उपलब्धि एवं परमशक्ति का सोपान है। श्रद्धा आध्यात्मिक जीवन का अभिषेक तत्व है।

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