नवीनतम प्रविष्टियां | पृष्ठ 2

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कर्म

कर्म ही मेरा धर्म है। कर्म ही पूजा है। कर्म ही जीवन व जगत का सत्य है। निष्काम कर्म, कर्म का अभाव नहीं, अपितु कर्त्तव्य के अहंकार का अभाव होता है।

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शिक्षा भारतीय भाषाओं में

विज्ञान तकनीकी एवं प्रबन्धन आदि की शिक्षा भारतीय भाषाओं व राष्ट्रभाषा हिन्दी में होनी चाहिए और देश के गरीब, मजदूर, किसान के बच्चों को भी  डाॅक्टर, इंजीनियर, आई.ए.एस., आई.पी.एस. व वैज्ञानिक बनने का हक मिलना चाहिए।

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संसाधन व संभावना

व्यक्ति के भीतरी संसाधनों के साथ परमात्मा ने प्रकृति में भी असीम संसाधन व संभावनाओं को पिरोया हुआ है | इन बाह्म व आन्तरिक संसाधनों का अत्यन्त विवेक पूर्ण उपयोग करने हेतु हमें अत्यन्त पुरुषार्थ व परमार्थ करते रहना चाहिए|

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पूर्ण सुखी जीवन

पूर्ण सुखी जीवन जीने के दो अत्यन्त महत्त्वपूर्ण उपाय है| एक हम बाह्मरूप से आर्थिक दरिद्रता से मुक्त रहें तथा दूसरा उपाय है हम ईश्वर प्रदत्त पूर्णता से युक्त रहें| बाह्म समृद्धि से हम बाहर से सुखी, स्वस्थ, सुरक्षित, सम्मानित व शान्तिपूर्ण जीवन जी सकें तथा अपने भीतर की निजता, दिव्यता व समस्त प्रकार की […]

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सेवा के अवसर ढू़ंढ़ते रहना चाहिए

बिना सेवा के चित्त शुद्धि नहीं होती है और चितशुद्धि के बिना परमात्मतत्त्व की अनुभूति नहीं होती। अतः सेवा के अवसर ढू़ंढ़ते रहना चाहिए।

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असम्भव को सम्भव

असम्भव को सम्भव करने की अपार क्षमता, सामर्थ्य व ऊर्जा तुम्हारे भीतर सन्निहित है। काल के भाल पर अपनी शक्ति, साहस व शौर्य से नया इतिहास लिखो।

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