नवीनतम प्रविष्टियां | पृष्ठ 2

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योग की प्रभुता

हैल्थ, हैप्पीनेस एवं हर्मनी का माध्यम है योग| स्वास्थ्य, विश्वशान्ति एवं विश्व की समग्र स्थायी विकेन्द्रित एवं न्यायपूर्ण सात्त्विक समृद्धि का भी एकमात्र साधन है योग। यह योगविद्या ही पराविद्या, ब्रह्मविद्या या अध्यात्मविद्या है।

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जीवन

पूरे जीवन को एक शब्द में कहें या परिभाषित करें तो वह है- अभ्यास। जैसे हमारे सोचने, विचारने, खाने-पीने, कमाने, बोलने व जीने के अभ्यास होते हैं, वैसा ही हमारा जीवन हो जाता है।

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योग

योग इस एक शब्द में पिण्ड व ब्रह्माण्ड के सम्पूर्ण सत्यों का समोवश है। बस आवश्यकता है योग के समग्र सत्य को समझने और उसके अनुसार जीने की।

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सकारात्मक सोच कैसे रखें

सकारात्मक सोचो, सकारात्मक सुनो, सकारात्मक देखो, सकारात्मक बात करो, सकारात्मक रहें, ये सब बहुत जरुरी है लेकिन हम छोटी-छोटी बातों में नकारात्मक सोचते है | मन में अच्छा विचार रखिये विचारों, भावना और कार्य ये जीवन चक्र है | इसलिए हमेशा सकारात्मक विचार, भावना और कार्य करने चाहिये |

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बुढ़ापा

बुढ़ापा आयु नहीं, विचारों का परिणाम है। यदि विचारों में जोश, शक्ति, शौर्य, साहस व स्वाभिमान है तो व्यक्ति आयु ढ़लने पर भी जवान होता है।

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योगी की विशेषता

पति के उत्तर-दायित्व पति धर्म, पत्नी के उत्तर दायित्व पत्नी धर्म, परिवार के उत्तर दायित्व को परिवार धर्म, समाज के उत्तर दायित्व को समाज धर्म, राष्ट्र के उत्तर दायित्व को राष्ट्र धर्म और विश्व के प्रति अपने जो कर्तव्य, उत्तर दायित्व  है उसको राष्ट्र धर्म की संज्ञा हमारे पूर्वजो ने दी है| एक योगी, योग […]

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