नवीनतम प्रविष्टियां | पृष्ठ 2

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मृत्यु समाधन नहीं

मृत्यु समाधन नहीं, क्योंकि मरकर पुनः जन्म लेना सुनिश्चित है, अतः दुनियाँ से भयभीत होकर, अपनों की पीड़ा एवं विश्वासघात से आहत होकर अवसाद में मृत्यु को स्वीकारना मूर्खतापूर्ण होगा।

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योग की महत्ता

बिना अष्टांग योग की साध्ना के कोई योगी नहीं बन सकता। हम योग के द्वारा एक स्वस्थ, समृद्ध व संस्कारवान् राष्ट्र व विश्व का निर्माण करना चाहते हैं।

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गलतियों की पुनरावृत्ति न हो

गलतियों की पुनरावृत्ति न हो, गलतियों की पुनरावृत्ति से प्रगति अवरूध्द हो जाती है और आत्मबल क्षीण हो जाता है।

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भीतर समग्रता

भगवान् महान् कार्य करने के लिए तुम्हारा चयन करना चाहते हैं। तुम उस विराट् को अपने भीतर समग्रता से उतरने तो दो।

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अपनी शक्तियों को पहचानों

बिना संघर्ष किए कभी भी विजय नहीं मिलती, अतः अपनी शक्तियों को पहचानों एवं संगठित होकर इन आसुरी शक्तियों को परास्त कर दो।

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वर्तमान में जीना

अतीत व्यतीत हो चुका है, भविष्यत अनागत है अतः जहाँ हो वहीं समग्रता से वर्तमान में जीना, ही योग है।

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