नवीनतम प्रविष्टियां | पृष्ठ 2

Archive

योग परम सत्य

योग जीवन एवं जगत का परम सत्य एवं जीव का ब्रह्म के साथ तन्मय तदाकार, तदरूप  या ब्रह्मरूप या ब्रह्ममय होने की साधना है।

० टिप्पणी
आगे पढ़ें
divider

सद्गुरुओं का सान्निध्य

बार-बार सद्गुरुओं का सान्निध्य एवं उनके जीवन, शिक्षाओं एवं आचरण का ध्यान हमें भीतर से बल प्रदान कराता है और हमारे जीवन के पुण्य को अखंड बनाये रखता है।

० टिप्पणी
आगे पढ़ें
divider

हमेशा मुस्कराते रहना चाहिए

यदि तुम मुस्कराते हो तो दुनिया मुस्कराती है और यदि तुम मायूस, उदास, हताश व निराश होते हो, तो दुनियाँ तुम्हें उदास सी दिखने लगती है।

० टिप्पणी
आगे पढ़ें
divider

सबसे बड़ा पुण्य

योग सेवा-सबसे बड़ा पुण्य, इस धरती पर सबसे पुण्य है वो योग सेवा का है | गौ-शाला बनाना-चलाना, अस्पताल बनाना-चलाना, विद्यालय बनाना-चलाना, किसी प्यासे को पानी पिलाना, भूखे को अन्न दे देना, निर्वस्त्र को वस्त्र दे देना, किसी मरीज को दवाई दे देना, किसी को जीवन में उभारना ये पुण्य के काम है | लेकिन […]

० टिप्पणी
आगे पढ़ें
divider

ज्ञान पूर्वक कर्म से उद्धार

जीवन में एक बात भी वेदों  की, शास्त्र की, गुरुओ की ऋषियों की  ठीक से समझ ले उसी से उद्धार हो सकता है| तेरा जन्म भगवान के लिए हुआ है, भगवान की प्राप्ति कैसे होगा कर्म कर, पुरुषार्थ कर, मेहनत कर| कर्महीन को धरती पर कुछ नहीं मिलता है, सिवाय दरिद्रता के, सिवाय दुःख के, सिवाय […]

० टिप्पणी
आगे पढ़ें
divider

ओ३म का अर्थ व महत्व

ओ३म कहने से परमात्मा के सभी नाम भज जाते है| सारे नाम , सारे गुण, सारे कर्म, सारे स्वभाव, सारे ऐश्वर्य, भगवान का जो अनन्त ज्ञान, सुख, शांति, आनन्द का जो श्रौत है वो ओ३म में सब कुछ आ गया | ओ३म हमें पिण्ड, ब्रम्हांड, सारे नाम, सारे ज्ञान, सारे ऐश्वर्य, सारे विद्या सारे आ […]

० टिप्पणी
आगे पढ़ें
divider
पिछला पृष्ठ | अगला पृष्ठ