नवीनतम प्रविष्टियां | पृष्ठ 2

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जीवन में संशय

बल का दुरुपयोग, ज्ञान का अनादर तथा विश्वास में संशय नहीं करना चाहिए। जीवन में संशय कम्प्यूटर के वायरस की तरह होता है।

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बुढ़ापा आयु नहीं

बुढ़ापा आयु नहीं, विचारों का परिणाम है। यदि विचारों में जोश, शक्ति, शौर्य, साहस व स्वाभिमान है तो व्यक्ति आयु ढ़लने पर भी जवान होता है।

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पवित्र विचार

जब अपवित्र विचारों से एक व्यक्ति के भीतर घृणा व नफरत के बीज बोये जा सकते हैं तो पवित्र विचारों से एक व्यक्ति के जीवन में प्रेम, करुणा व वात्सल्य के पुष्प क्यों नहीं खिलाए जा सकते?

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वर्णाश्रम धर्म

मेरे मस्तिष्क में ब्राह्मण जैसा विवेक, मेरी भुजाओं में क्षत्रियों जैसा शौर्य, बल पराक्रम ऊर्जा व स्वाभिमान, उदर में वैश्य जैसा व्यापार व प्रबन्धन कौशल व चरणों में शूद्रवत् सेवा करने का सामर्थ्य है। यही मेरा वर्णाश्रम धर्म है।

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कर्मफल

कर्मफल कर्म करने वाले को ही मिलता है तथा उसका प्रभाव, परिणाम, लाभ, हानि, यश व अपयश आदि अन्य व्यक्ति, परिवार, समाज, राष्ट्र व समष्टि को भी प्राप्त होता है।

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भगवान् का प्रसाद

मैं जो भी पा रहा हूँ, सब भगवान् का प्रसाद है। मैं भगवान् का पुत्र-पुत्री हूँ, वह विश्वनियन्ता ब्रह्माण्ड का रचयिता भगवान् मेरा पिता है, विश्व की सर्वोपरि सत्ता-शक्ति के आशीष, सदा मेरे शीश पर हैं।

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