नवीनतम प्रविष्टियां | पृष्ठ 3

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जीवन की प्रेरणा

हर दिन प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में उठते ही ये विचार व चिंतन करें कि मैं मूलतः ईश्वर की संतान, ऋषि-ऋषिकाओं, वीर-वीरांगनाओंकी संतान या भारत माता की संतान हूँ।

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दिव्यता से जुड़ना योग

आत्मा जब परमात्मा की उपासना करता है तो भगवान् के दिव्य ज्ञान, दिव्य प्रेरणा, दिव्य सामर्थ्य, दिव्य सुख-शान्ति एवं दिव्य आनन्द से युक्त हो जाता है। भगवान् की दिव्यता से जुड़ना यही योग है।

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दिव्य जीवन का उपाय

योगचेतना, उच्चचेतना, दिव्यचेतना, आत्मचेतना, गुरुचेतना, ऋषिचेतना व भागवत चेतना में जीने का प्रयत्नपूर्वक अभ्यास करें|

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ब्रह्म-सम्बन्ध्

भगवान् ही माता-पिता बनकर हमें जन्म देते हैं तथा गुरु बनकर हमें ज्ञान देते हैं। इस प्रकार सब सम्बन्धों में ब्रह्म-सम्बन्ध् की अनुभूति करना ही योग है।

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योग की प्रभुता

हैल्थ, हैप्पीनेस एवं हर्मनी का माध्यम है योग| स्वास्थ्य, विश्वशान्ति एवं विश्व की समग्र स्थायी विकेन्द्रित एवं न्यायपूर्ण सात्त्विक समृद्धि का भी एकमात्र साधन है योग। यह योगविद्या ही पराविद्या, ब्रह्मविद्या या अध्यात्मविद्या है।

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जीवन

पूरे जीवन को एक शब्द में कहें या परिभाषित करें तो वह है- अभ्यास। जैसे हमारे सोचने, विचारने, खाने-पीने, कमाने, बोलने व जीने के अभ्यास होते हैं, वैसा ही हमारा जीवन हो जाता है।

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