नवीनतम प्रविष्टियां | पृष्ठ 3

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भक्तियोग

भक्तियोग ज्ञानपूर्वक अकर्त्ता होकर जो दिव्य कर्म किया जाता है वही भक्तियोग है | अकाम, अचाह या निष्काम होकर अनासक्त भाव से हम जो भी सेवा, कर्म, तप, पुरुषार्थ या दिव्य प्रवृत्ति करते हैं वह सब भक्तियोग ही है |

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विचार का महत्व

विचार ही परिपक्व होकर संस्कार या स्वभाव के रूप में हमारे साथ जुड़ जाते है | सबसे पहला प्रभाव होता है माता-पिता से, फिर परिवार, स्कूल, समाज इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं| इस सम्पूर्ण सृष्टि के यदि कोई वस्तु है तो वह विचार या संकल्प और पुरुषार्थ है और उसी का विस्तार एवं परिणाम है […]

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सम्पूर्ण आजादी

सम्पूर्ण आजादी के मूल में तीन प्रकार की आजादी ही प्रमुख हैं | राजनैतिक, आर्थिक व शैक्षणिक आजादी| यदि ये तीन प्रकार की हमें स्वाधीनता मिल जाए, तो हम अन्य स्वाधीनताए तो स्वयं प्राप्त कर सकते है |

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शक्ति तुम्हारे भीतर है

अंधेरों को उजालों में, दुःख को सुख में, प्रतिकूलता को अनुकूलता में व राजय को विजय में बदलने की शक्ति तुम्हारे भीतर है।

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उद्योग मन्दिरों

जैसे मन्दिर में एक दिन भी हड़ताल नहीं होती और नित्य प्रति मन्दिर के पट खुलते हैं, वैसे ही कारखानों, उद्योग मन्दिरों में हड़ताल नहीं होनी चाहिए। कारखानों की हड़ताल को हमें देशद्रोह जैसे अपराध् की तरह देखना चाहिए।

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नया इतिहास

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