नवीनतम प्रविष्टियां | पृष्ठ 3

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भगवान् दयालु पिता है

भगवान् से पद, सत्ता, सम्पत्ति या दुनियाँ के वैभव की याचना नहीं करना क्योंकि वह दयालु पिता बिना मांगे हमारी क्षमता, योग्यता अथवा पात्राता से सदा ही अधिक देता है।

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विकास का अर्थ

विकास का अर्थ यह नहीं कि एक समर्द्ध समृद्ध व्यक्ति और अधिक सम्पत्ति अर्जित कर ली है अपितु देश व दुनियाँ के अंतिम आम आदमी को शिक्षा, चिकित्सा, सामाजिक न्याय व सम्मान हम कितना दे पा रहे हैं।

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क्या है बुद्धि के तीन भाग

धृति, कृति, स्मृति, धृति-मतलब अच्छा-बुरा विचार करने वाली बुद्धि, कृति-जो धृति में अच्छा है वो आप के मन में ऐसा बैठ जाये कि ये आप का संस्कार बन जाये, आप का अभ्यास बन जाये, स्मृति-एक क्षण भी अपने लक्ष्य की विस्मृति नहीं होनी चाहिये

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योग की महिमा

योग से हम रोग मुक्त, व्यसन मुक्त, हिंसा मुक्त, हर प्रकार के नशे से मुक्त होते हैं| योग से सब प्रकार के ज्ञान से, सब प्रकार के दिव्य संवेदना से, दिव्य सामर्थ्य से दिव्य शक्ति से युक्त होते है यह है, योग की महिमा|

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कामयाबी का मंत्र

कामयाबी के लिए अच्छी आदत होना जरुरी है, अच्छा सोचना, अच्छा देखना, अच्छा सुनना, अच्छा खान-पान, अच्छी भावनाए ह्रदय में  रखना, चाहे लाख बुराईयां चारो तरफ आपको देखने को मिलती हो, आप नकारात्मक पथ पर जाओ मत |

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सन्यासी

सत्य और असत्य को साफ-साफ देखता है और फिर सत्य का चयन करता है असत्य को दूर हटाता जाता है वह है असली सन्यासी|

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